Friday, January 11, 2019

नॉर्वे का नथुराम

पेशावर स्कूल में जो बच्चे मारे गए थे,  आप को याद ही होगा। माताओं का विलाप हृदय को हमेशा दहला देता है, चाहे शत्रु की माता ही क्यों न हों । लेकिन इससे शत्रु का संहार करना कम अनिवार्य नहीं होता और न ही हाथ कांपना चाहिए, नहीं तो अपनी मौत निश्चित होती है । और यह भी जान लीजिये कि शत्रुत्व की शुरुआत उनकी तरफ से हुई है, हमेशा । इस बात को भूलना नहीं चाहिए, वे कितने भी झूठ के ढ़ोल पीट लें ।

अस्तु, पेशावर के हत्याकांड को लेकर एक अलग नजरिया रख रहा हूँ । कहीं ऐसा तो नहीं कि यह संदेश दिया गया कि हमें अपने बच्चों की बलि तुम्हारे लिए चढ़ाना स्वीकार नहीं ? हम बच्चे पैदा करते हैं तो हमारे भी उनके लिए कोई अरमान हैं, बस तुम्हारे लिए लड़ाके और बच्चे पैदा करने की मशीनें नहीं बनाना उनको । बच्चा खोने का दुख हम भी समझा देते हैं तुम्हारी औरतों को क्योंकि तुम तो यह बात उनसे करोगे नहीं !

वाम हो या इस्लाम हो, अपने खिलाफ उठती आवाजों को दबा देना उनका इतिहास ही नहीं, उनकी परंपरा भी है और उनके नजर में परम समर्थनीय भी क्योंकि वाम या इस्लामी शासन पर सवाल उठाना ही गुनाह करार दिया गया है । इसलिए मारनेवालों को निर्दयता से मारा गया, उनके कारण कभी सामने आए नहीं, जो भी आया वो सरकारी लीपापोती ही थी।

लेकिन इसपर यहाँ के किसी भी fiberal को कुछ भी अजीब नहीं लगा। बच्चे मारे गए थे, माताएँ रो रही थी तो उनके दुख में सहभागी हो कर मारनेवालों की निंदा करना ही आसान था। यहाँ उन्हें कारण ढूँढने नहीं थे, क्योंकि यहाँ के भायजान लोगों से रिश्ता भी निभाना था ।

झूठ का दबाव हद पार कर जाता है तो कहीं प्रतिक्रिया होती है । नॉर्वे में भी हुई थी जब एक व्यक्ति ने 2011 में कुल 77 जानें ली थी। राजधानी ओस्लो के नजदीक एक द्वीप है उतोया, जो पिकनिक स्पॉट भी है । राजधानी ओस्लो में उसने एच ब्लॉक नामक एक बिल्डिंग में बम लगाया था और वहाँ भी कुछ लोग मारकर भागा था । उल्लेखनीय है कि इस एच ब्लॉक में नॉर्वे के प्रधानमंत्री का ऑफिस है । बम उसकी अपेक्षा जितना नुकसान नहीं कर पाया, या उसे उतना नुकसान करना भी नहीं था यह पता नहीं चल पाया । इसलिए पता नहीं चल पाया क्योंकि उस आदमी पर जो मुकदमा चला वहाँ उसके बयान को सार्वजनिक नहीं होने दिया है, बस उसको जो सज़ा हुई है उसका ही पता चला है । ता उम्र कैद है, क्योंकि नॉर्वे में मृत्युदंड देने की मनाई है ।

बच्चे जो मारे गए, उनके नाम, वय आदि ही उपलब्ध है, एक बात को प्रचारित नहीं किया जाता कि ये सभी बच्चे सत्ताधारी पक्ष के युवा वाहिनी से संबन्धित थे तथा उनके अभिभावक भी सत्ताधारी पक्ष से जुड़े हैं । कौनसे नेता या मंत्री ने अपनी संतान खोयी इसपर चुप्पी है । पूर्व प्रधानमंत्री की पोती / नाती भी उस पिकनिक में थी । लेकिन सरकार ने नेता या पक्ष कार्यकर्ताओं को हुए इस नुकसान को कोई हवा नहीं दी।

अधिकांश जगहों पर हत्यारे के उद्देशों को लेकर मौन है । हालांकि जब हत्या ताजा थी तब कुछ खबरें थी लेकिन बाद में वे डिलीट हुई शायद, अब जो भी रिपोर्ट हैं काफी साफ सफाई किए हुए हैं ।

लेकिन आप ने जो अब तक ऊपरी तीन परिच्छेदों में पढ़ा है, उनके आधार पर मैं उस व्यक्ति को नॉर्वे का नथुराम कहूँ तो आप को शायद आश्चर्य नहीं होगा।

बहुत अरसे बाद एक लंबे लेख में उसके उद्दिष्टों का छोटा सा उल्लेख है । अर्थात उसे बहुत हल्के में लिया गया है और उस व्यक्ति की तथा उसके उद्दिष्टों की भी भरपूर निंदा करने के बाद ही आठ दस वाक्यों में उसकी बात को समेटा गया है तथा उसका मज़ाक भी उड़ाया गया है । लेकिन शुक्र है कि कम से कम उसका उल्लेख तो किया है किसी ने ।

क्या लिखा है उसके उद्देशों के बारे में ?

Earlier that day, before he parked the Volkswagen van at H-Block, he e-mailed a document to 8,000 acquaintances and strangers explaining what he was about to do and why. It has an ominous title—”2083: A European Declaration of Independence”—and is illustrated at the end with photos of Breivik pointing guns and sheathed in a biohazard suit and sporting regal costumes he has made befitting a commander. The document (he calls it “the compendium”) is 1,500 pages long and praises, among others, Pamela Geller and Robert Spencer. He claims it required several years and almost $400,000 to produce.
It is written, densely and ponderously, with a pretense of scholarship. It is also historically illiterate and thematically illogical and can be reduced to an index card: Liberals are willfully enabling radical Muslims to destroy European civilization. Therefore, liberals must be killed.

Breivik never denies committing the crimes, only that they are, in fact, criminal acts. He believes Islamicization is an existential threat to the West and that hunting teenagers at a summer camp and blowing up office workers and pedestrians is the brutal yet necessary beginning of a counterrevolution.

He believes history will revere him.

He fears only that he, and thus his ideas, will be found insane.

उसने एक बड़ा ग्रंथ लिखा है जिसको लिखते कई साल लगे और लगभग चार लाख डॉलर खर्च हुए । कहा है कि उसे इतिहास का सेंस नहीं है, कोई लॉजिक का ज्ञान नहीं और जो इतने ढेर सारे पन्ने हैं उसका सार एक इंडेक्स कार्ड में आ सकता है – नॉर्वे के लिबरल सत्ताधारी जान बूझकर, सोच समझकर मुस्लिम अतिवादियों को यूरोपीय संस्कृति का विध्वंस करने दे रहे हैं । इसलिए लिबरलों को मारना आवश्यक है । वो अपने कृत्यों को नकारता नहीं, केवल उन्हें गुनाह नहीं मानता । वो दृढ़ता से मानता है कि इस्लाम तो पश्चिमी सभ्यता के अस्तित्व पर ही खतरा है और उसने जो किया वो प्रतिक्रांति की एक क्रूरतापूर्ण किन्तु आवश्यक शुरुआत है ।

वो यह मानता है कि इतिहास उसके साथ न्याय करेगा। लेकिन उसे डर है कि उसे पागल ठहराया जाएगा अत: उसके विचारों को भी पागलपन ठहराया जाएगा।

लिंक यह रही, यह परिच्छेद लगभग अंत में है लेकिन इतना भी अंत में नहीं कि पाठक उसे याद रखे।

https://www.gq.com/story/anders-behring-breivik-norway-massacre-story

जिन बच्चों को मार दिया वे पंद्रह से उन्नीस के बीच के थे । नॉर्वे में लिबरल्स शादियाँ कम करते हैं और बच्चे उससे भी कम पैदा करते हैं । बच्चों की उम्र कुछ ऐसी है कि इस उम्र में माँ बाप के लिए दूसरा बच्चा पैदा करना और उसका सिरे से लेकर लालन पालन अशक्य हो जाता है ।

इसे “नॉर्वे का नथुराम” यूं ही नहीं कहा है ।

पेशावर के मिलिटरी स्कूल में पाकिस्तानी फौजी अफसरों के बच्चों का संहार हो या यह नॉर्वे का नरसंहार हो, दोनों में कहीं तो प्रेशर कुकर की सीटी सुनाई देती है । इससे अधिक मुझे कुछ नहीं कहना।

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1 comment:

  1. पहले लिंक पढ़ना जरूरी है।

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