आप की नज़र में आवश्यक सेवाएँ क्या क्या हैं ? कृपया उन आवश्यक सेवाओं की लिस्ट बनाएँ जिनके बिना आप के लिए जीना दुश्वार है । घर पर बिजली पानी से ले कर दूध, चाय, विविध होम डिलिवरी की सेवाएँ, होटल, ढाबा, टपरी, सिगरेट, पान गुटखा, दारू तथा FB और WA भी गिन सकते हैं । गटर सिस्टम ठीक से काम करना , चोक हो कर न बहना आदि भी ।
- अब खुद से ही यह पूछिए कि अगर ये सेवाएँ खंडित हो जाएँ तो आप के सब्र का बांध कितने समय में टूटेगा ?
- कितने समय में आप गालियां देने लगेंगे, कितने समय में हिंसा पर उतारू हो जाएँगे ?
- कितने समय में आप सरकार पर इसका ठीकरा फोड़कर सामने पड़ते सरकारी कर्मचारी को मारपीट पर आमादा हो जाएँगे ?
- कितने समय में इन्हें मुहैया करनेका वादा करनेवाले के सामने दंडवत हो जाएँगे, उसकी कोई भी शर्तों को मानकर ? हाँ, कारण होते ही हैं, मैं तो झेल लेता लेकिन पत्नी की, बच्चे की , बूढ़े माँ बाप की हालत देखी नहीं जाती मेरे से .....
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उत्तर लिखने की आवश्यकता नहीं । ये सब इसलिए गिनवाया ताकि युद्धसमय में यह सब हो जाता है । जो युद्ध हम पहले लड़ चुके हैं वहाँ हमारे शत्रुओं को तब मिसाइल टेक्नोलोजी उपलब्ध नहीं थी, इसलिए हमारे शहर बचे रहे । आज सब को वो टेक्नोलोजी उपलब्ध है और शहर प्रथम निशानेपर होते हैं । इसीलिए जो भी बम ब्लास्ट्स हुए, शहरों में ही तो हुए थे । हाँ, हम भी उनको बर्बाद कर देंगे इसी विश्वास के कारण हमारे शत्रु भी फुल स्केल वॉर नहीं छेड़ते।
और अगर किसी को यह मुगालता है कि मिसाइल हवा में ही रोके जा सकते हैं, तो यह बात सम्पूर्ण सत्य नहीं है । इसीलिए तो उत्तर कोरिया की धमकियों को अमेरिका गंभीरता से लेता है और संवाद बनाए रखता है ।
बाकी सावधान रहें, जरूरतें कम करें, अपने से कम सम्पन्न धर्मबंधुओं को अपने पैरों पर खड़े होने में यथाशक्ति सहायता करें । क्योंकि युद्ध हमेशा सेनाओं के बीच ही नहीं होता बल्कि नागरिकों को मानसिक गुलाम बनाकर राष्ट्र जीते जाते हैं ।
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यह ब्लॉग पोस्ट लिखने का कारण यही है कि समाज में हमेशा जल्द तैश में आनेवालों की कमी नहीं होती । सरकार की मर्दानगी उनका पसंदीदा शिगूफ़ा होता है । इनको उलाहना देकर उकसाना आसान होता है और सरकार विरोधी इनको ही टार्गेट करते हैं ताकि वे दूर रहें और येही उनका काम कर दें । ऐसा ही होता भी रहा है ।
दूसरे विश्वयुद्ध के समय ब्रिटेन में एक पोस्टर मुहिम चलाई गयी थी - Careless Talk Costs Lives - बातों में लापरवाही जानलेवा हो सकती है । गूगल पर images में सर्च कीजिये । और हाँ, कृपया Bomb damage in London in WW II गूगल कर के वे फ़ोटोज़ भी अवश्य देखें । London की जगह Berlin भी लिखकर देखिये ।
मान्यवर मैं तो यही जानता हूँ कि अपने देश की जनता बहुत ही नकारा किस्म की है,अगर युद्ध कही छिड़ भी गया तो ये कहेंगे कि वो तो सरकार का काम है।" मुझे इससे क्या"?
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